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A short story from the book – ‘ Ehasaanso ka Ashiyana’
जीवन में मुझे इतनी शर्मिंदगी कभी नहीं हुई जितनी अभी हो रही थी। मैं सिर्फ अपने ऑफिस का मेनेजर ही बनकर रह गया, जो मेरा भाग्य बनकर इस दुनिया में आई है.. उसका चेहरा भी इस वक्त देखने को नसीब नहीं हुआ मुझे। मेरे पिताजी के अनुसार मैंने जीवन में बहुत कुछ पा लिया पर हासिल न कर सका…

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